Tuesday, August 16, 2011

कांग्रेस ने देश पर शासन का नैतिक अधिकार खोया


कांग्रेस ने देश पर शासन का नैतिक अधिकार खोया 
बाबारामदेव पर अमानुषिक अत्याचार, युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज और अन्ना हजारे के आन्दोलन को कुचलने का कुप्रयास कांग्रेस की सत्ता लालच की मनोवृत्ति की झलकियां है। कांग्रेस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी सहन नहीं होते है।

जिस प्रकार कांग्रेस सत्ता प्रतिष्ठान बाबा रामदेव, अन्ना हजारे, संघ और नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध कीचड़ उछालने का प्रयत्न कर रहा है, वह निंदनीय है। यह असहिष्णुता की पराकाष्ठा है। लोकतंत्र में ऐसा आचरण अक्षम्य है।

जिस प्रकार 1975 में कांग्रेस लोकनायक जयप्रकाश नारायण और सम्पूर्ण क्रांति आंदोलनकारियों के विरुद्ध विष वमन कर रही थी, वैसा ही वर्तमान में किया जा रहा है। आज देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है। जनता के लोकतंत्रिक अधिकारों का दमन और अत्याचार से अपहरण कर लिया गया है।

कांग्रेस ने देश पर शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। केन्द्रीय गृहमंत्री और गृह सचिव लोकतांत्रिक अधिकारों के पडयंत्र पूर्वक हनन के दोषी है। उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण चलाया जाना चाहिए।

Tuesday, July 12, 2011

केन्द्र सरकार की विश्वसनीयता शुन्य

जुलाई 12, 2011

केन्द्र सरकार की विश्वसनीयता शुन्य

केन्द्रीय सरकार और कांग्रेस गठबंधन की जनता में विश्वसनीयता शुन्य स्तर पर पहुँच गई है। केन्द्रीय मंत्रीमंडल से दागी और अक्षम मंत्रियों को हटानें में प्रधानमंत्री असमर्थ दिखे। सरकार में महंगाई और भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने की दूरदृष्टी का अभाव स्पष्ट दिख रहा है।

विगत 7 वर्षों से महंगाई पर नियंत्रण के कोई प्रयास संप्रग सरकार नें नहीं किए हैं। खाद्यान्नों, सब्जियों, कपड़ो, औषधियों, सहीत आम उपभोग की सभी वस्तुओं के मूल्यों में भारी वृद्धि के कारण साधारण नागरिकों का जीवनयापन अत्याधिक कठिन होता जा रहा है।

दुःख की बात तो यह है कि सत्तारूढ़ नेता मंहगाई पर नियंत्रण के प्रश्नों को टालते दिखते हैं। उनके पास नहीं तो इच्छाशक्ति दिखती है, नहीं कोई ठोस नीति।

सरकारी नीतियों पर विभिन्न कंपनी समुहों का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। आम जनता की भलाई गौण हो चुकी है। सरकार का सारा प्रयास और समय भ्रष्टाचार में संलिप्त सहयोगियों को बचानें में ही लग रहा है। सरकार विधिक कार्रवाई करने के पहले उन्हें बचाव के रास्ते ढुंढने का पर्याप्त समय देती है।

यह सरकार जनता में अपनी मर्यादा और प्रभाव को खो चुकी है। कांग्रेस तुष्टीकरण को सत्ता बचाने का एकमात्र विकल्प मान कर नीतियाँ बना रही है। प्रधानमंत्री सत्ता में बने रहने के लिए कोई भी समझौता करने को तत्पर रहते हैं। देश की सर्वाधिक भ्रष्ट सरकार नें सुरक्षा को ही खतरें में डाल दिया है।

Sunday, July 3, 2011

महान क्रांतिकारी एवं दूरदर्शी राजनेता थे वीर सावरकर


जुलाई 3, 2011

महान क्रांतिकारी एवं दूरदर्शी राजनेता
थे वीर सावरकर: किरण

3 जुलाई को वीर सावरकर के अण्डमान जेल जाने के 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। वीर सावरकर को 4 जुलाई, 1911 को बंदी वनाया गया था।

वीर सावरकरमहान क्रांतिकारी, चिंतक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता थे। वे पहले भारतीय थे जिसने सन् 1906 में 'स्वदेशी' का नारा दे, विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी। वे पहले भारतीय थे जिन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की। वे पहले भारतीय थे जिन्होंने सन् 1857 की लड़ाई को भारत का 'स्वाधीनता संग्राम' बताते हुए लगभग एक हजार पृष्ठों का इतिहास 1907 में लिखा।   

आज यदि आधा पंजाब और आधा बंगाल भारत में है तो  उसके लिए हम वीर सावरकर के ऋणी है। जब कांग्रेस नें कायरता और सत्ता के लालच में विभाजन स्वीकार कर लिया तो, ब्रिटिश योजना पूरे बंगाल और पंजाब को पाकिस्तान में सम्मिलित करने की थी। वीर सावरकर नें ही इन प्रांतों के हिन्दू बहूल क्षेत्रों को भारत में रखने का अभियान चलाया था। उन्होंने १८५७ के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज खोजपूर्ण इतिहास लिख कर ब्रिटिश शासन को हिला डाला था।

वीर सावरकर को नमन करते समय अटलजी की ये पंक्तियां स्मरण हो आती है।
याद करें काला पानी को, अंग्रेज़ों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते, सावरकर की बलिदानी को।

Wednesday, June 29, 2011

कांग्रेस रैली में दिखी केवल चिढ़ और खीज


जून 29, 2011

कांग्रेस रैली में दिखी केवल चिढ़ और खीज

जयपुर की कांग्रेस रैली को आत्म प्रवंचना और जनता को भ्रमित करने का निष्फल प्रयास मात्र है। रैली में कांग्रेसी नेताओं के उद्बोधनों में मलिन होती छवि और बढते जन आक्रोश के कारण उत्पन्न हताशा झलक रही थी।

जनता कांग्रेस से अरबों रूपयों के महा घोटालों का सच जानना चाहती है। संसद की लोक लेखा समिति और संयुक्त संसदीय समिति में कांग्रेसी सदस्यों के आचरण से स्पष्ट है कि वे यथार्थ तथ्यों के अन्वेषण में बाधा डाल रहे है। डीजल और रसोई गेस के मूल्यों में राहत जले पर नमक छिड़कने की तरह है।

संत रामदेव बाबा और गांधीवादी अन्ना हजारे के चरित्र हनन के कांग्रेसी प्रयासों से उसकी सामन्ती मानसिकता का पता चलता है। यह बदले की भावना और अविवेक की पराकाष्ठा है। इससे विरोध करने वालों को कुचलने की आपातकालीन मानसिकता दिखती है। ये रैलियां विरोधियों को चुप करने के लिए सत्ता का निरूंकुश उपयोग, लोकतंत्र में अविश्वास और सामंती सोच की कांग्रेसी संस्कृति का निर्लज्ज उदारहण है।

Sunday, June 26, 2011

कांग्रेस में आज भी आपातकालिन मानसिकता


जून 26, 2010

कांग्रेस में आज भी आपातकालिन मानसिकता

कांग्रेस पार्टी का चरित्र मूलतः लोकतंत्र विरोधी है। यह सत्ता पर एकाधिकार की मनोवृति से ग्रस्त है। 1975 में आपातकाल लगाने, समाचार माध्यमों का गला घोंटने और सारे देश को बंदीगृह में रुपान्तरित करने की दोषी है कांग्रेस। किन्तु इस अक्षम्य पाप के लिए इसने आज तक राष्ट्र से क्षमा नहीं मांगी है।

आपातकाल की 36वीं वर्षगांठ हमें फिर तानाशाही का आभास करवा रही है। 4 जून की रात्री को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस के क्रूर चेहरे का यथार्थ सामने आया था। यह सर्वविदित है कि देश में सर्वोच्च सत्ता के सूत्र प्रधानमंत्री के हाथ में नहीं है। कांग्रेस अध्यक्षा संविधानेत्तर सत्ता का केन्द्र बन गई है। कांग्रेसी मंत्रियों के 2011 के वक्तव्यों और 1975 के वक्तव्यों में आश्चर्य जनक समानता है।

आपातकाल के काले दिनों को विस्मृत करना लोकतंत्र के लिए घातक होगा। आतंक के दुर्दिनों को भूलना निरंकुश सत्ता को फिर से न्यौता देने के समान है। नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त और पीजे थॉमस को मुख्य सतर्कता आयुक्त बनाने में कांग्रेस नें नैतिकता की सारी मर्यादाएं तोड़ दी थी। कांग्रेस समर्पित न्यायपालिका, चाटुकारी नोकरशाही और आज्ञाकारी समाचार जगत में विश्वास रखती है।

Saturday, May 21, 2011

थाने में नवयुवती के साथ दुष्कृत्य की घटना एक जघन्यतम अपराध


छोटी सादड़ी दुष्कृत्य के दोषियों को हो एक माह में सजा

राजस्थान के छोटी सादड़ी थाने में नवयुवती के साथ दुष्कृत्य की घटना एक जघन्यतम अपराध है।

प्रशासन इस दुष्कृत्य प्रकरण को फास्ट ट्रेक न्यायालय में चलाए। राजस्थान में विदेशी बालाओं के प्रकरण में मात्र 30 दिन में दोषियों को सजा दिलवाई गई थी। छोटी सादड़ी दुष्कृत्य प्रकरण में भी इसी प्रकार दोषी पुलिस कर्मियों को एक माह में सजा दिलवाना सुनिश्चित किया जाए।

दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध चालान 7 दिन में न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। छोटी सादड़ी दुष्कर्म की घटना का विरोध कर रहे ग्रामीणों का पुलिस दमन एवं प्रताड़ना अविलम्ब रोकी जाए।

ग्रामीणों के विरुद्ध लगाए गए सभी आपराधिक आरोंप निरस्त किए जाए। बंदी बनाए गए ग्रामीणों को अविलम्ब छोड़ा जाए। गहलोत सरकार आपातकाल की मानसिकता छोड़े। दमन एवं अत्याचार से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन मूलभूत अधिकार है। छोटी सादड़ी घटना की गम्भीरता के परिप्रेक्ष्य में विरोध प्रदर्शन अत्याधिक संयमित था।

Thursday, May 12, 2011

भाजपा शासित राज्यों नें प्रस्तुत किया लोक कल्याण एवं विकास का आदर्श


मई 12, 2011
भाजपा शासित राज्यों नें प्रस्तुत किया
लोक कल्याण एवं विकास का आदर्श : किरण माहेश्वरी
12 मई 2011 को लेकसिटी प्रेस क्लब उदयपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक किरण माहेश्वरी द्वारा दिया गया वक्तव्य
सुराज के लिए प्रतिबद्धता
उदयपुर 12 मई। भाजपा शासित राज्य लोक कल्याणकारी योजनाओं को लागु करने और विकास के राष्ट्रीय आदर्श बन गए हैं। केन्द्र सरकार की भारी उपेक्षा और कांग्रेस के शत्रुतापूर्ण व्यवहार के उपरान्त भी इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों नें स्व पोषित योजनाओं के माध्यम से अपने राज्यों का काया पलट कर दिया है।
सुराज के लिए भाजपा सरकारों के प्रयासों के अनुभवों को अत्यंत प्रेरणादायी हैं। सुराज गोष्ठी में भाजपा शासित राज्यों में पुन: जनादेश प्राप्त करनें की प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। भाजपा मुख्यमंत्रियों की उत्कृष्ट छवि से संगठन का जनाधार बढानें में लाभ मिलेगा।
केन्द्र सरकार ने भी सराहा
गुजरात में नरेन्द्र भाई मोदी ने गांव ढाणी मजरों में त्रिप्रावस्था विद्युत आपूर्ति की महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी की। केन्दर सरकार ने इस योजना को राजीव गांधी विद्युत आपूर्ति योजना के नाम से पुरे देश में लागु की। मध्यप्रदेश सरकार की महिला कल्याण की लोकप्रिय योजना लाड़ली लक्ष्मी की भी केन्द्रीय सरकार ने नकल की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्जा उत्पादन एवं वितरण के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल की है। वहां मुख्यमंत्री रमनसिंह ने 2 रु. किलो चावल गरीब एवं पिछड़ो को मिले, इसकी सुव्यवस्था की है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने अंत्योदय योजना से अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त की थी। सभी भाजपा राज्यों में अन्त्योदय योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। राजग सरकार के समय अटल जी ने इसे पुरे देश में लागु करने का प्रयास किया था। ग्रामीण रोजगार योजना, अंत्योदय योजना का ही संशोधित संस्करण है। योजनाओं को केन्द्र सरकार द्वारा अपनाया जाना सबसे बड़ी सराहना है।
लोक सेवा गांरटी योजना
मध्यप्रदेश एवं बिहार सरकारों ने जनता को समयबद्ध, त्वरित एवं गुणवत्ता युक्त सेवाएं देने के लिए लोक सेवा गारंटी योजना लागु की है। इसमें सरकारी अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा में जनता के विभिन्न आवेदनों एवं मांगों का निस्तारण करना अनिवार्य है। म.प्र. के मुख्य मंत्री शिवराजसिंह जी ने वहां लोक सेवा प्रबंधन नाम से एक स्वतंत्र विभाग का गठन किया है। इस विभाग की उपयोगिता इससे सिद्ध हो जाती है कि स्थापना के प्रथम सात माहों में हीं 38 लाख आवेदन पत्र प्राप्त हुए और इनमें से 36 लाख आवेदनों का निस्तारण कर दिया गया। जिन आवेदनों में प्रक्रियागत कमी थी, ऐसे शेष आवेदकों को भी पूर्ण संतुष्ट किया गया।

केन्द्र सरकार का सौतेला व्यवहार
केन्द्र सरकार प्रतिपक्ष शासित राज्यों के साथ भारी सौतेलेपन का व्यवहार कर रही है। म.प्र. को दिए जाने वाले 530 करोड़ रुपयों के विशेष अनुदान को घटाकर 300 करोड़ कर दिया गया । विगत 2 वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में एक भी रुपया नहीं दिया गया। केन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड एवं हिमाचल प्रदेश को दिया गया विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन समुच्चय को बंद कर दिया है, जबकि जम्मु कश्मीर में यह यथावत है।
सशस्त्र सोनाओं में हिमाचल प्रदेश के युवाओं की सर्वाधिक भागीदारी है। जम्मु कश्मीर में 8 हजार करोड़ का विशेष पैकेज (समुच्चय) युवाओं के लिए दिया गया जबकि हिमाचल प्रदेश को इससे वंचित रखा गया। हिमाचल प्रदेश सरकार को विकास के कीर्तिमान बनाने पर केन्द्र सरकार के 37 पुरस्कार प्राप्त हुए है। गुजरात राज्य के संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम में केन्द्र सरकार स्वीकृति नहीं दे रही है, जबकि महाराष्ट्र के ऐसे ही कानुन को स्वीकृति दी गई है।
निर्धन चयनित परिवारों की सूची में भेदभाव
खाद्य सुरक्षा योजना में निर्धन चयनित परिवारों को निशुल्क: अन्न वितरण किया जाता है। निर्धन चयनित परिवारों की सूची बनाने का कार्य राज्य सरकार करती है। केन्द्र सरकार भाजपा शासित राज्यों में चयनित परिवारों की नवीनतम सूची को स्वीकृत नहीं कर रहां है। इस कारण अनाज का अंशभाग50से 60 % परिवारों को मिले इतना ही दिया जा रहा है। इन राज्यों के अधिकार का अनाज, कांग्रेस शासित राज्यों को दिया जा रहा हैं।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम
केन्द्र सरकार ने निशुल्क/: एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के नाम पर झुठी वाह-वाही लुटने का निष्फल प्रयास किया है। एक वर्ष बाद भी राज्यों में शिक्षा का संगठनात्मक ढांचा तक नही बन पाया है। राज्यकोष से निजी सस्थानों में शिक्षा का प्रावधान जनता के धन का दुरुपयोग है। इससे केवल निजी संस्थानों को ही लाभ होगा। इस योजना के लिए केन्द्र सरकार आवश्यक संसाधन ही नही दे रही है। केवल विहार में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 40 हजार, करोड़ रुपये चाहिए। राज्य का समग्र बजट ही 65 हजार करोड़ रुपयों का है। केन्द्र एक रुपया नहीं दे रहा है। केन्द्र सरकार शिक्षा के प्रति उदासीन है।
संघीय ढांचे पर प्रहार
केन्द् सरकार ने राष्ट्रीय अनुसंधान अधिकरण (एन...) को राज्य सरकरों को प्रताड़ित करने और उनके कार्यों में हस्तक्षेप करने का माध्यम बना दिया है।
इस अधिकरण को केवल आतंकवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा तक ही समित रहना था। किन्तु इसका कार्य क्षेत्र बढ़ा कर खेल,साम्प्रदायिक दंगों, राज्यों के प्रशासनिक निर्णयों तक विस्तारित कर दिया गया है। यह प्राधिकरण सीधे ही केन्द्रीय जांच ब्युरों एवं नयायलयों में प्रकरण दे रहा है, राज्य सरकारों की भूमिका को उपेक्षित कर रहा है। राज्यों की पुलिस व्यवस्था में राजनैति पूर्वाग्रहों के आधार हस्तक्षेप का बढ़ा माध्यम बन गया है यह अधिकरण।


कांग्रेस पार्टी में एक गुप्त अस्थिरता कक्ष
भाजपा सरकारों को अस्थिर धरना कांग्रेस पार्टी की कार्यसुची में सबसे उपर है. केन्द्रीय गृह मंत्री , सर्वोच्च एव उच्च न्यायालयों के कुछ न्यायाधींशों एवं केन्द्रीय जांच ब्युरों, केन्द्रीय अनुसंधान अधिकरण, विषेश जांच दल के सक्रिय सहयोग से कांग्रेस पार्टी एक गुप्त अस्थिरता कक्ष चला रही है। इसका लक्ष्य झुठें वाद प्रकरणों, केन्द्रीय योजनाओं में भेदभाव, समाचार माध्यमों के दुरुपयोग से भाजपा सरकारों को अस्थिर करना है। बड़ी मात्रा में स्वैच्छिक संगठनों को धन देकर भाजपा के विरुद्ध दुष्प्रचार का अभियान इसकी एक बड़ी रणनीति है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुन्धरा जाप में व्यस्त
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्षम नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वे विगत ढाई वर्षों से केवल वसुंधरा राजे के नाम का ही जाप कर रहे है। राज्य के विकास, जनता के कल्याण और लोकतंत्र सुदृढ़ता से राज्य सरकार ने किनारा कर लिया है। स्वयं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कांग्रेसी विधायक सदन में शोरगुल कर कार्यवाही नहीं चलने दे रहे है। भ्रष्टाचार एवं पारिवारिक हिंतों के लिए लोकधन का दूरुपयोग उनकी कार्यशैली बन गई है। तेल शोधन संयत्र, बिजली घरों के लिए कोयला, राजगार गारंटी और सड़को के लिए केन्द्रीय सहायता, राज्य मे रेल परिवहन का विस्तार आदि में अशोक गहलोत कुछ भी नहीं कर पाए है। केन्द्र में उनकी कोई सुनता ही नहीं है।