Thursday, May 12, 2011

भाजपा शासित राज्यों नें प्रस्तुत किया लोक कल्याण एवं विकास का आदर्श


मई 12, 2011
भाजपा शासित राज्यों नें प्रस्तुत किया
लोक कल्याण एवं विकास का आदर्श : किरण माहेश्वरी
12 मई 2011 को लेकसिटी प्रेस क्लब उदयपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक किरण माहेश्वरी द्वारा दिया गया वक्तव्य
सुराज के लिए प्रतिबद्धता
उदयपुर 12 मई। भाजपा शासित राज्य लोक कल्याणकारी योजनाओं को लागु करने और विकास के राष्ट्रीय आदर्श बन गए हैं। केन्द्र सरकार की भारी उपेक्षा और कांग्रेस के शत्रुतापूर्ण व्यवहार के उपरान्त भी इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों नें स्व पोषित योजनाओं के माध्यम से अपने राज्यों का काया पलट कर दिया है।
सुराज के लिए भाजपा सरकारों के प्रयासों के अनुभवों को अत्यंत प्रेरणादायी हैं। सुराज गोष्ठी में भाजपा शासित राज्यों में पुन: जनादेश प्राप्त करनें की प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। भाजपा मुख्यमंत्रियों की उत्कृष्ट छवि से संगठन का जनाधार बढानें में लाभ मिलेगा।
केन्द्र सरकार ने भी सराहा
गुजरात में नरेन्द्र भाई मोदी ने गांव ढाणी मजरों में त्रिप्रावस्था विद्युत आपूर्ति की महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी की। केन्दर सरकार ने इस योजना को राजीव गांधी विद्युत आपूर्ति योजना के नाम से पुरे देश में लागु की। मध्यप्रदेश सरकार की महिला कल्याण की लोकप्रिय योजना लाड़ली लक्ष्मी की भी केन्द्रीय सरकार ने नकल की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्जा उत्पादन एवं वितरण के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल की है। वहां मुख्यमंत्री रमनसिंह ने 2 रु. किलो चावल गरीब एवं पिछड़ो को मिले, इसकी सुव्यवस्था की है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने अंत्योदय योजना से अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त की थी। सभी भाजपा राज्यों में अन्त्योदय योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। राजग सरकार के समय अटल जी ने इसे पुरे देश में लागु करने का प्रयास किया था। ग्रामीण रोजगार योजना, अंत्योदय योजना का ही संशोधित संस्करण है। योजनाओं को केन्द्र सरकार द्वारा अपनाया जाना सबसे बड़ी सराहना है।
लोक सेवा गांरटी योजना
मध्यप्रदेश एवं बिहार सरकारों ने जनता को समयबद्ध, त्वरित एवं गुणवत्ता युक्त सेवाएं देने के लिए लोक सेवा गारंटी योजना लागु की है। इसमें सरकारी अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा में जनता के विभिन्न आवेदनों एवं मांगों का निस्तारण करना अनिवार्य है। म.प्र. के मुख्य मंत्री शिवराजसिंह जी ने वहां लोक सेवा प्रबंधन नाम से एक स्वतंत्र विभाग का गठन किया है। इस विभाग की उपयोगिता इससे सिद्ध हो जाती है कि स्थापना के प्रथम सात माहों में हीं 38 लाख आवेदन पत्र प्राप्त हुए और इनमें से 36 लाख आवेदनों का निस्तारण कर दिया गया। जिन आवेदनों में प्रक्रियागत कमी थी, ऐसे शेष आवेदकों को भी पूर्ण संतुष्ट किया गया।

केन्द्र सरकार का सौतेला व्यवहार
केन्द्र सरकार प्रतिपक्ष शासित राज्यों के साथ भारी सौतेलेपन का व्यवहार कर रही है। म.प्र. को दिए जाने वाले 530 करोड़ रुपयों के विशेष अनुदान को घटाकर 300 करोड़ कर दिया गया । विगत 2 वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में एक भी रुपया नहीं दिया गया। केन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड एवं हिमाचल प्रदेश को दिया गया विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन समुच्चय को बंद कर दिया है, जबकि जम्मु कश्मीर में यह यथावत है।
सशस्त्र सोनाओं में हिमाचल प्रदेश के युवाओं की सर्वाधिक भागीदारी है। जम्मु कश्मीर में 8 हजार करोड़ का विशेष पैकेज (समुच्चय) युवाओं के लिए दिया गया जबकि हिमाचल प्रदेश को इससे वंचित रखा गया। हिमाचल प्रदेश सरकार को विकास के कीर्तिमान बनाने पर केन्द्र सरकार के 37 पुरस्कार प्राप्त हुए है। गुजरात राज्य के संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम में केन्द्र सरकार स्वीकृति नहीं दे रही है, जबकि महाराष्ट्र के ऐसे ही कानुन को स्वीकृति दी गई है।
निर्धन चयनित परिवारों की सूची में भेदभाव
खाद्य सुरक्षा योजना में निर्धन चयनित परिवारों को निशुल्क: अन्न वितरण किया जाता है। निर्धन चयनित परिवारों की सूची बनाने का कार्य राज्य सरकार करती है। केन्द्र सरकार भाजपा शासित राज्यों में चयनित परिवारों की नवीनतम सूची को स्वीकृत नहीं कर रहां है। इस कारण अनाज का अंशभाग50से 60 % परिवारों को मिले इतना ही दिया जा रहा है। इन राज्यों के अधिकार का अनाज, कांग्रेस शासित राज्यों को दिया जा रहा हैं।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम
केन्द्र सरकार ने निशुल्क/: एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के नाम पर झुठी वाह-वाही लुटने का निष्फल प्रयास किया है। एक वर्ष बाद भी राज्यों में शिक्षा का संगठनात्मक ढांचा तक नही बन पाया है। राज्यकोष से निजी सस्थानों में शिक्षा का प्रावधान जनता के धन का दुरुपयोग है। इससे केवल निजी संस्थानों को ही लाभ होगा। इस योजना के लिए केन्द्र सरकार आवश्यक संसाधन ही नही दे रही है। केवल विहार में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 40 हजार, करोड़ रुपये चाहिए। राज्य का समग्र बजट ही 65 हजार करोड़ रुपयों का है। केन्द्र एक रुपया नहीं दे रहा है। केन्द्र सरकार शिक्षा के प्रति उदासीन है।
संघीय ढांचे पर प्रहार
केन्द् सरकार ने राष्ट्रीय अनुसंधान अधिकरण (एन...) को राज्य सरकरों को प्रताड़ित करने और उनके कार्यों में हस्तक्षेप करने का माध्यम बना दिया है।
इस अधिकरण को केवल आतंकवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा तक ही समित रहना था। किन्तु इसका कार्य क्षेत्र बढ़ा कर खेल,साम्प्रदायिक दंगों, राज्यों के प्रशासनिक निर्णयों तक विस्तारित कर दिया गया है। यह प्राधिकरण सीधे ही केन्द्रीय जांच ब्युरों एवं नयायलयों में प्रकरण दे रहा है, राज्य सरकारों की भूमिका को उपेक्षित कर रहा है। राज्यों की पुलिस व्यवस्था में राजनैति पूर्वाग्रहों के आधार हस्तक्षेप का बढ़ा माध्यम बन गया है यह अधिकरण।


कांग्रेस पार्टी में एक गुप्त अस्थिरता कक्ष
भाजपा सरकारों को अस्थिर धरना कांग्रेस पार्टी की कार्यसुची में सबसे उपर है. केन्द्रीय गृह मंत्री , सर्वोच्च एव उच्च न्यायालयों के कुछ न्यायाधींशों एवं केन्द्रीय जांच ब्युरों, केन्द्रीय अनुसंधान अधिकरण, विषेश जांच दल के सक्रिय सहयोग से कांग्रेस पार्टी एक गुप्त अस्थिरता कक्ष चला रही है। इसका लक्ष्य झुठें वाद प्रकरणों, केन्द्रीय योजनाओं में भेदभाव, समाचार माध्यमों के दुरुपयोग से भाजपा सरकारों को अस्थिर करना है। बड़ी मात्रा में स्वैच्छिक संगठनों को धन देकर भाजपा के विरुद्ध दुष्प्रचार का अभियान इसकी एक बड़ी रणनीति है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुन्धरा जाप में व्यस्त
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्षम नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वे विगत ढाई वर्षों से केवल वसुंधरा राजे के नाम का ही जाप कर रहे है। राज्य के विकास, जनता के कल्याण और लोकतंत्र सुदृढ़ता से राज्य सरकार ने किनारा कर लिया है। स्वयं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कांग्रेसी विधायक सदन में शोरगुल कर कार्यवाही नहीं चलने दे रहे है। भ्रष्टाचार एवं पारिवारिक हिंतों के लिए लोकधन का दूरुपयोग उनकी कार्यशैली बन गई है। तेल शोधन संयत्र, बिजली घरों के लिए कोयला, राजगार गारंटी और सड़को के लिए केन्द्रीय सहायता, राज्य मे रेल परिवहन का विस्तार आदि में अशोक गहलोत कुछ भी नहीं कर पाए है। केन्द्र में उनकी कोई सुनता ही नहीं है।

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